मनातल्या गुजगोष्टी....................
PC & Copyright : Durgesh Mahajan ' प्रतिबिंब '... माझेच प्रतिबिंब तू , माझीच सावली.... स्पर्शुन तुलाही न स्पर्शीलेली..... समोरच आहेस माझ्यातलीच मी... तरीही का परक्याप्रमाणे भासली... - नंदिनी हाटकर. ____________________________________ मंजिले मिल ही जाती हे जिंदगीमे; हर मुश्किल रास्तोंसे गुजरने के बाद..... पर सामने मुश्किल रास्तां भी ना हो; तो आखिर कैसे पहुंचे उन मंजिलों के पास...... - नंदिनी हाटकर. ____________________________________ सुहाने मौसम मे अचानक; घने बादल छाने लगे.... दिल बोला..... बादल जैसे आए; वैसे चले भी जायेंगे क्यों ना थोडा मुस्कुरालु............ - नंदिनी हाटकर. - क्रमशः..... मनातल्या गुजगोष्टी : भाग - २ ---------------------------------------------------------------------------- 'कला' हे एक असं माध्यम आहे जे तुम्हाला व्यक्त व्हायला मद...